બુધવાર, 22 માર્ચ, 2017

अगर आज "भगत" जिन्दा होता अरे दोस्तों तूम पे शर्मिन्दा होता




अगर आज "भगत" जिन्दा होता
अरे दोस्तों तूम पे शर्मिन्दा होता
"भगत" मेरे सपनो में आया था
उसने मुझे खुद बताया था
में मेरी माँ का दुलारा था
बाप का होनहार लाडला था
जब में कॉलेज पंहुचा था
मुज पर भी कोई मरता था
मेंने तो सिर्फ इतना जाना था
गोरे भेड़ियो से देश को बचाना था
आज़ादी से शादी करके
मेने कसम खायी थी
अपनी जान देके सहादत पाई थी
अब देखता हु
दुखी होकर सोचता हु
में करता था मुर्तिया से नफरत
आज मेरी मुर्तिया लगायी जाती है
मेंने खड़े किये थे खुदा पे सवाल
मुझे भगवान बता के फूलमाला चढ़ाते है
बस इतना कहना है दोस्तों
अभी में मरा नहीं,
 कितने सिने में जिन्दा हु
बस इतना है की
मेरी विरासत संभालने वालो
आज तुम से शर्मिदा हु ।

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