अगर हर औरत सीता हो,
हर पल उसकी अग्निपरीक्षा हो,
तो किस काम की आजादी
अगर हर घर में बेटे हो,
हर पल बेटीआ जलानी हो
तो किस काम की आजादी
अगर दलील करना आता हो
हर पल बोलने पर पांबदी हो
तो किस काम कि आजादी
अगर प्रेम करना आता हो
हर पल दीलो पे पहरा हो
तो किस काम की आजादी
अगर आप अौर में ईसान हो
हर पल इन्सानीयत शर्मसार हो
तो किस काम की आजादी
अगर मेरा देश मुजे प्यारा हो
हर पल मुजे जताता पडतां हो
तो किस काम की आजादी
अगर आप अौर हम भी इन्सान हो
हर पल मुजे तो इन्सान में गीना न जाता हो
तो किस काम की आजादी

ટિપ્પણીઓ નથી:
ટિપ્પણી પોસ્ટ કરો