શુક્રવાર, 16 સપ્ટેમ્બર, 2016

जब पैदा हुवा तो फटी बिस्तर मिली । दूध पिने की उम्र से सिर्फ ठोकर मिली ।






जब पैदा हुवा तो फटी बिस्तर मिली ।
दूध पिने की उम्र से सिर्फ ठोकर मिली ।।

किताबो का मुह देखा तो लाचारी मिली ।
वहा भी एक राजा-रानी की कहानी मिली ।।

फिर सोचा क्यों हु बेबस तो एक अलमारी मिली।
खोल के देखा तो उसमे बंद जवानी मिली ।।

जवानी में प्यार की बातें सिर्फ रूहानी मिली ।
रोटी कपडे की दौड़ में घर बसाने की रवानी मिली ।।

हाथ घिसे चन्द सिक्के इक्कठे करने में, सिर्फ नाकामी मिली ।
रोज सजदा किया, माथा टेका कही कोई मूरत न मिली ।।

अब पैसा नहीं, अब रोटी नहीं, अब दौड़ा तो इज्जत न मिली ।
अब भी थका नहीं, बार बार फिर वही पुरानी कहानी मिली ।।

अब तो तेरी दुनिया को उजड़ देनेवाली ख्वाहिश मिली ।
पनपी आग सिने में, तब एक नइ कहानी मिली ।।

अब किताबो से गायब राजा-रानी की कहानी मिली ।
देखा कुछ बदल रहा है, तब सीने की आग खली मिली ।।









 

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